रुद्राक्ष खरीदते समय सावधानियां एवं धारण विधि

रुद्राक्ष खरीदते समय सावधानियां एवं धारण विधि

 

रुद्राक्ष आध्यात्मिक दृष्टि से जितना मूल्यवान है, उतना भौतिक दृष्टिकोण से नहीं फिर भी रुद्राक्ष खरीदते समय जो सामान्य जानकारी ग्राहक को होनी चाहिए उसकी चर्चा भी आवश्यक है। रुद्राक्ष खरीदते समय जब दुकानदार ८-१० रु° से लेकर ४००-५०० रु० तक की माला ग्राहक के सामने रखता है तो निश्चित ही खरीददार के मन में ये बात आती है कि सस्ती वाली माला बेकार है और महंगी वाली ही असली होगी। चार सौ रुपये वाली माला ही प्रभावशाली होगी और सस्ती वाली नहीं। लेकिन रुद्राक्ष की मालाओं का मूल्य उसके छोटे तथा बड़े आकार के दानों पर निर्भर करता है। आज तक जो मध्यम आकार के रुद्राक्ष की माला जो सबसे सस्ती मिलती है उस रुद्राक्ष के दाने के आकर से रुद्राक्ष जितना छोटा होता जायेगा उसी अनुपात से उसका मूल्य बढ़ता जाता है। काली मिर्च के दाने के बराबर की माला यदि ४०० रु० में मिलती है तो बड़े ऑवले के समान रुद्राक्ष के दानों की माला का मूल्य भी लगभग इतना ही होगा । ठीक इसी प्रकार से रुद्राक्ष के मुखों के हिसाब से भी रुद्राक्ष का मूल्य कम ज्यादा होता है। पांचमुखी रुद्राक्ष सबसे कम मूल्य में मिल जाता है जिसके एक दाने की कीमत ५० पैसा या एक रुपया होती है। इससे जितने मुख अधिक होते जायेंगे रुद्राक्ष की कीमत भी बढ़ती जायेगी और जितने मुख कम होते जायेंगे तो भी कीमत बढ़ जाएगी। पाँचमुखी रुद्राक्ष चूँकि सस्ता होता है इसलिए उसमें बेईमानी

नहीं होती लेकिन कुछ बेईमान व्यापारी सात और आठ मुखी रुद्राक्ष नकली नालियाँ बनाकर तैयार करते हैं। यदि आप ध्यान से देखेंगे तो आपको पता लग सकता है कि यह नकली बना है या असली है। इस प्रकार से तीन मुखी रुद्राक्ष की एक या दो नालियाँ खत्म करके दो मुखी और एक मुखी रुद्राक्ष बनाया जाता है। किन्तु गौर से देखने पर इसका पता भी लग जाता है। एक मुखी रुद्राक्ष आजकल लगभग अप्राप्य है इसलिए उसका मूल्य हजारों रुपयों में ऑका जाता है। कुछ लोग बेर की गुठलियों की माला भी रुद्राक्ष कहकर बेच देते हैं, परन्तु बेर की गुठली पर न तो धारियाँ ही होती हैं और न ही उसके पृष्ठ पर मुद्रायें बनी होती हैं। लकड़ी के बढ़िया कारीगर लकड़ी पर खोद कर भी रुद्राक्ष तैयार करते हैं जिसके तैयार करने में उन्हें १५-२० दिन तक लग जाते हैं और ये कारीगर उसे नेपाल में ले जाकर बेचते हैं। नेपाल जाने वाले यात्री इसे वहाँ से खरीदकर पुन: भारत ले आते हैं। यह नकल केवल एक मुखी रुद्राक्ष के अप्राप्त होने के कारण हो रही है। असली एक मुखी रुद्राक्ष का मूल्य एक लाख रुपये तक ऑका जाता है और नेपाल में रुद्राक्ष का व्यापारी ग्राहक को ये विश्वास दिलाता है कि सबसे अधिक रुद्राक्ष नेपाल में पाया जाता है इसलिए वह उसे ५-१० हजार में बेचकर ठग लेते हैं। इसलिए रुद्राक्ष खरीदते समय ग्राहक को पूरी सावधानी से खरीदना चाहिए। रुद्राक्ष अमूल्य वस्तु हैं। जैसे भी हो इसे कहीं से भी प्राप्त करके परीक्षा करके धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष के विषय में धारक को किसी प्रकार से भ्रम में न पड़कर श्रद्धा एवं विश्वास के साथ धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष धारण करने के ४० दिन के अन्दर जिस कार्य के लिए आप इसे धारण करेंगे उसमें लाभ अवश्य होगा। सोने अथवा

चाँदी के तारों में पिरोकर इनकी माला धारण करनी चाहिए। इसके अभाव में लाल धागे का प्रयोग कर सकते हैं। रुद्राक्ष की माला धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष इन चारों फलों को प्रदान करने वाली है। संसार में इसके समान और कोई माला फलदायी नहीं है। कुछ लोगों को भ्रम है कि इसे साधु-महात्मा ही पहनते हैं लेकिन ये उनकी भूल है। संन्यासियों को जहाँ इसे धारण करने पर धर्म और मोक्ष की प्राप्ति होती है तो वहाँ सांसारिक प्राणी को इसे धारण करने से धर्म की मर्यादा में रहकर अर्थ और काम का उपभोग करते हुए मोक्ष मिलता है। संसार के अनेक प्रकार के भौतिक दुखों में सन्तप्त मनुष्यों के लिए यह शिव का वरदान है। इसे गृहस्थी और साधु सभी धारण कर सकते हैं। रुद्राक्ष धारण करने वाले की अकालमृत्यु नहीं होती यह अनुभूत सत्य है।

 

इन्हें भी देखे: