नाथ सम्प्रदाय के बारह पंथ

नाथ सम्प्रदाय के बारह पंथ

 

नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी मुख्यतः बारह शाखाओं में विभक्त हैं, जिसे बारह पंथ कहते हैं । इन बारह पंथों के कारण नाथ सम्प्रदाय को ‘बारह-पंथी’ योगी भी कहा जाता है । प्रत्येक पंथ का एक-एक विशेष स्थान है, जिसे नाथ लोग अपना पुण्य क्षेत्र मानते हैं । प्रत्येक पंथ एक पौराणिक देवता अथवा सिद्ध योगी को अपना आदि प्रवर्तक मानता है । नाथ सम्प्रदाय के बारह पंथों का संक्षिप्त परिचय इस प्रकार है – 1. सत्यनाथ पंथ – इनकी संख्या 31 बतलायी गयी है । 2. धर्मनाथ पंथ – इनकी संख्या २५ है । 3. राम पंथ – इनकी संख्या ६१ है । 4. नाटेश्वरी पंथ अथवा लक्ष्मणनाथ पंथ – इनकी संख्या ४३ है । 5. कंथड़ पंथ – इनकी संख्या १० है । 6. कपिलानी पंथ – इनकी संख्या २६ है । 7. वैराग्य पंथ – इनकी संख्या १२४ है । 8. माननाथ पंथ – इनकी संख्या १० है । 9. आई पंथ – इनकी संख्या १० है । 10. पागल पंथ – इनकी संख्या ४ है । 11.ध्वजनाथ पंथ – इनकी संख्या ३ है । 12. गंगानाथ पंथ – इनकी संख्या ६ है । कालान्तर में नाथ सम्प्रदाय के इन बारह पंथों में छह पंथ और जुड़े – १॰ रावल (संख्या-७१), २॰ पंक (पंख), ३॰ वन, ४॰ कंठर पंथी, ५॰ गोपाल पंथ तथा ६॰ हेठ नाथी । इस प्रकार कुल बारह-अठारह पंथ कहलाते हैं । बाद में अनेक पंथ जुड़ते गये, ये सभी बारह-अठारह पंथों की उपशाखायें अथवा उप-पंथ है । कुछ के नाम इस प्रकार हैं – अर्द्धनारी, अमरनाथ, अमापंथी। उदयनाथी, कायिकनाथी, काममज, काषाय, गैनीनाथ, चर्पटनाथी, तारकनाथी, निरंजन नाथी, नायरी, पायलनाथी, पाव पंथ, फिल नाथी, भृंगनाथ आदि

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