इंसान (मनुष्य) तीन तरह के होते हैं

एक तालाब में तीन मछलियाँ बड़े प्यार से रहती थी। एक दिन उस तालाब के किनारे कुछ मछुआरें आए और आपस में कहने लगे- अरे! यहाँ पर तो कई मछलियाँ दिखाई दे रही है? कल यहाँ आकर जाल डालते हैं। मछलियों ने उनकी बातें सुनी और चिंता में पड़ गई।

तीनों में से पहली मछली बोली- अरे! हम यहीं पर ठीक हैं। यह कोई आवश्यक तो नहीं कि कल वो लोग वापस आए। दूसरी मछली बोली- ‘मेरे विचार से तो जीवन बचाने के लिए हम आज ही कहीं चली जाएँ। वह मछली तालाब छोड़कर उसी से जुड़ एक दूसरे पोखर में चली गई। तीसरी बोली- ‘कल जब ये लोग आएंगे, तब परिस्थिति के अनुसार निर्णय ले लूगी।’ अगली सुबह मछुआरे वहाँ आ पहुँचे। उन्होंने मछलियाँ पकड़ने के लिए जाल डाल दिया। पहली मछली पकड़ी गई। दूसरी मछली तो पहले ही वहाँ से चली गई थी। तीसरी मछली ने मरने का नाटक किया। उसे मरा समझकर मछुआरों ने उसे जाल से निकाल दिया। वह तुरंत उचक कर गहरे पानी में तैरती हुई दूर चली गई। पहली पकड़ी हुई मछली भाग्य के भरोसे रहने की आदत को कोसती हुई मछुआरों का शिकार बन गई। इसी प्रकार शिष्यों इंसान भी तीन तरह के ही होते हैं।

दूरदर्शी – जो आने वाले काल को सोचकर कार्य करते हैं। सारा धन एक साथ खर्च नहीं करते   | भविष्य की सोचते हैं |आने वाले प्रतिकूल समय में बचाव का विचार रखते हैं।

तुरंत निर्णय लेने वाले – ऐसे व्यक्ति देश, काल, परिस्थिति के अनुसार तुरंत निर्णय लेते हैं। संकट से तत्कालिक निर्णय लेकर बचाव करते हैं। लेकिन यह क्षमता बहुत कम लोगों मे होती है।

भाग्य भरोसे रहने वाले – ऐसे व्यक्ति सामने संकट आता  देखकर भी अपनी आँखे बंद कर लेते हैं और सोचते हैं कि संकट टल जायेगा | कर्म करने के स्थान पर भाग्य भरोसे बैठे रहते हैं |

भाण्य उन्हीं का साथ देता है जो स्वय श्रमशील हैं, कर्मठ हैं और मेहनती हे |

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