गौरी शंकर रुद्राक्ष के फायदे व धारण विधि

गौरी शंकर  और त्रिजुगी

 सब प्रकार के रुद्राक्षों के अलावा कुछ रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से आपस में जुड़े होते हैं (जैसे जुड़वां केला आपने अवश्य देखा होगा) ये जुड़वां रुद्राक्ष भी वृक्ष पर ही होते हैं। अत: इस प्रकार से दो रुद्राक्ष जो जुड़वां उत्पन्न होते हैं उन्हें गौरी शंकर कहते हैं। इसी प्रकार यदि तीन रुद्राक्ष एक साथ जुड़े होते हैं तो उसे त्रिजुगी कहते हैं। ये भी बहुत कम मात्रा में पाये जाते हैं अतएव इनका महत्व भी बहुत हो गया है।

यह रुद्राक्ष शिव और शक्ति का मिश्रित स्वरूप माना जाता है। जो व्यक्ति एक मुखी रुद्राक्ष प्राप्त करने में असमर्थ हों उनके लिए ये उत्तम वस्तु है। घर में, पूजा गृह में, तिजोरी में मंगल कामना की सिद्धि के लिए इसे रखना लाभदायक है। इसे शिवलिंग से स्पर्श कराकर धारण करना चाहिए। धारण करते समय ‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप करते हुए पवित्र स्थान पर बैठकर धारण करें। श्रद्धा तथा विश्वास और शुद्ध मन से धारण करने वाले पर शिव तथा शक्ति दोनों की विशेष कृपा रहती है। विदेशी विद्वानों का भी मत है कि इसे धारण करने से हिम्मत बनी रहती है और सफलता मिलती है। गौरी शंकर धारण करने वाले को सांसारिक लाभ तो उतने नहीं मिलते जितने रुद्राक्षधारी को मिलते हैं परन्तु आध्यात्मिक लाभ में कोई कमी नहीं होती। यह भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाता है और मूल्य भी अधिक नहीं होता।

गौरीशंकर में असली नकली की पहचान

प्राय: जो गौरीशंकर नकली बनाकर बेचे जाते हैं वह इस प्रकार से बनाये जाते हैं-दो पंचमुखी रुद्राक्षों को लेकर पत्थर पर पानी की सहायता से इस प्रकार से घिसा जाता है कि एक ओर की सारी धारियाँ घिस जायें और दोनों घिसे हुए दानों को आपस में फेवीकोल या एरलडाइट से जोड़ दिया जाता है। असली गौरीशंकर की पहचान ये है कि उस पर बनी हुई धारियाँ प्राकृतिक होती हैं, कुल मिलाकर एक गौरीशंकर पर ७ या ८ धारियाँ होंगीं परन्तु परस्पर उनमें दूरी का अन्तर होता है, एक समान दूरी पर नहीं होती। असली गौरीशंकर वज्र के समान होगा। काफी शक्ति लगाने पर भी उसे तोड़ना या दोनों रुद्राक्षों का अलग हो जाना कठिन है। यदि आप परीक्षण के रूप में उसे तोड़ देंगे तो टूटे हुए भाग समान सपाट नहीं होंगे, उनका टूटना प्राकृतिक रूप से विखण्डित होगा। इसी प्रकार यदि आप किसी रुद्राक्ष को भी तोड़ेंगे तो टूटे हुए खण्ड तिरछे-वांके होंगे जैसे कोई पत्थर टूटता है। त्रिजुगी के असली नकली की पहचान भी उपरोक्त आधार पर की जा सकती है त्रिजुगी प्राकृतिक रूप से कम उत्पन्न होते हैं इसलिए इनका मूल्य भी गौरीशंकर से अधिक होता है।

गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण कैसे करें-

गौरी शंकर रुद्राक्ष प्राकृतिक स्वभाव से ही यह वृक्ष से जुड़ा हुआ उत्पन्न होता है। गौरी शंकर रुद्राक्ष को भी शिव शक्ति तुल्य अपार शक्ति वाला तथा शिव-शक्ति का स्वरूप ही माना गया है, इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करने से शिव व शक्ति अर्थात् शंकर व पार्वती दोनों ही प्रसन्न होते हैं। इसे घर में रखकर विधिवत् पूजा करने से मोक्ष को देने वाला, खजाने में रखने से खजाने को बढ़ाने वाला होता है। इससे एक मुखी रुद्राक्ष से प्राप्त होने वाले सभी फल प्राप्त होते हैं। इसके दर्शन मात्र से सभी प्रकार का आनन्द व सुख मिलता है। इसे भी लाल या पीले धागे में पिरोकर सोमवार के दिन नहाधोकर शिवलिंग व पार्वती के चरणों में स्पर्श करके ‘शिव शक्ति रुद्राक्षय नमः’ मन्त्र का जप करते हुए हृदय कर धारण करना चाहिए। इसे एकमुखी रुद्राक्ष के अभाव में धारण किया जाता है।

 

 

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