Religious

9
Feb

सिद्ध चौरंगीनाथ का गुरु आज्ञा से पुन: अपनी राजधानी लौटना

सिद्ध चौरंगीनाथ का गुरु आज्ञा से पुन: अपनी राजधानी लौटना सिद्ध योगी चौरंगीनाथ जी गुरु आज्ञा शिरोधार्य कर कलकत्ता से भ्रमण करते-करते एवं मार्ग में योग प्रचार करते-करते एक दिन शालीपुर (स्यालकोट) पहुँचे गए। यहाँ पहुँचकर आपने उसी बाग में अपना आसन लगाया जोकि आपके पिताजी ने आपके पहले जन्मदिन पर स्मारक के रूप में बनवाया था। परन्तु जब से

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9
Feb

त्याग एक वरदान है

त्याग एक वरदान है त्याग भारतीय संस्कृति की एक शानदार परम्परा रही है। बिना त्याग के लोक-परलोक व्यर्थ हो जाएँ। अगर आत्मा शरीर का त्याग करके परमात्मा में विलीन न हो तो दुनिया में कोई मरेगा नहीं और अगर कोई मरा ही नहीं तो संसार चक्र को चलाना परमात्मा के लिए कठिन हो जाएगा। आत्मा परमात्मा में विलीन नहीं होगी,

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9
Feb

सच्चा स्वर्ग

सच्चा स्वर्ग मनुष्य स्वर्ग की कल्पना क्यों करता है? सिर्फ इसलिए कि वहाँ खुशियाँ ही खुशियाँ हैं, विषाद, दु:ख-दर्द का कहीं नाम भी नहीं है? यदि उतनी खुशियाँ आप आसपास के माहौल से बटोरना शुरू कर दें तो वह भी स्वर्ग हो जाएगा। लगातार कोशिशों के बावजूद जीवन में खुशी नहीं है तो इसका मतलब है कि आपने मूलतत्त्व की

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9
Feb

सोच का महत्त्व

सोच का महत्त्व सोच का महत्त्वजब तक इंसान सिर्फ अपने सुखों के लिए सोचता है वो सुखी नहीं हो पाता, पर जब वह दूसरों के सुख के लिए सोचता है तो परमात्मा उसके भाग्य में स्वत: सुख लिख देता है परन्तु इस तथ्य को समझने में हमारी पूरी जि़न्दगी गुजर जाती है कि हम तभी सुखी हो सकते है जब

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6
Feb

श्री बाबा मस्तनाथ लघु कथाएं

वाणी पर संयम वाणी पर संयम एक पहलवान रास्ते से जा रहा था। सामने से आते हुए एक दुर्बल व्यक्ति को पता नहीं क्या सूझा वह उस पहलवान से कहने लगा- ”ऐसा मोटा शरीर किस काम, जहाँ भी बैठते हो, दो-तीन लोगों की जगह रोक लेते हो।ÓÓ बस इतना सुनना था कि पहलवान का सधा हुआ हाथ उस दुर्बल व्यक्ति के

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6
Feb

श्री बाबा मस्तनाथ स्तुति

  हे नाथों के नाथ, सिद्ध शिरोमणि श्री बाबा मस्तनाथ जी आपको वंदन है। आपको नमन है। आपकी शोभा, आपके भाव एवं आपकी मुद्रा निराली है। हे योगेश्वर आप त्रिनेत्र से युक्त हैं। आनन्द हास्य से परिपूर्ण, भय को शांत कर अभय प्रदान करने वाले हैं। मनुष्य पशु-पक्षी, चलचर, भूत-पिशाच आप सबके गुरु हैं। हे सिद्ध शिरोमणि जिनके कान समुद्र

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6
Feb

श्री बाबा मस्तनाथ वराष्टकम्

शोभा विशालं गिरिशाक्षामालं शीताशुंभालं निजभक्तपालम्।  शोभा विशालं गिरिशाक्षामालं शीताशुंभालं निजभक्तपालम्।  अज्ञान कालं कलिकाल कालं श्री मस्तनाथं सततं नमामि।।  भावार्थ:  रूद्राक्ष की माला धारण करने वाले, विशाल शोभा वाले, चन्द्रमा के समान मस्तक वाले, अपने भक्तों के  रक्षक, अज्ञान नाशक, कलियुग के लिए काल के समान श्री बाबा मस्तनाथ जी की मैं निरंतर स्तुति करता हूँ। यस्य प्रसादात्सकला जनानां कामादि दोषा खुलयान्तिना शम्।  धन्यं वदान्यं

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6
Feb

परमेश्वर को हम प्रत्यक्ष गुरुदेव के रूप में देख सकते है

नमामि सद्गुरु शान्तं प्रत्यक्ष: शिव रूपिणम्। नमामि सद्गुरु शान्तं प्रत्यक्ष: शिव रूपिणम्। सिरसा योग पीठस्थ मुक्ति कामार्थ सिद्धिदम्।। श्री गुरु परमानन्दम् वन्दे स्वानन्द विग्रहम्। यस्यसान्निध्य मात्रेण चिदानन्दाय यते तनु।।   हमारे जीवन प्रदाता माता-पिता के पश्चात् इस जीवन को सही दिशा में संचालित करने के लिए श्री सद्गुरु रूपी करणधार की परम आवश्यकता है। हमारे परम पुण्य बाबाजी गुरुदेव ब्रह्मलीन

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6
Feb

महासिद्ध श्री चौरंगीनाथ जी का जन्म

  देवों के समय में गान्धर्व देश, स्यालकोट जो आजकल पाकिस्तान में हैं राजा शालिवाहन का राज्य था। राजा अत्यन्त धार्मिक एवं न्यायकारी था। राजा प्रजा को अपनी संतान की भाँति स्नेह करता था। उनके राज्य में प्रजा सुखी और सम्पन्न थी। राजा की सुशील, रूपवती एवं पतिव्रता रानी थी जिसका नाम इन्छरादे था। वर्षों बीत जाने के पश्चात् भी

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6
Feb

गोरख वाणी से

मरो वे जोगी मरौ, मरौ मरण है मीठा। मरो वे जोगी मरौ, मरौ मरण है मीठा। तिस मरणी मरौ, जिस मरणी गोरख मरि दीठा।।   मिट जाओ, मर जाओ, तो दिखाई पड़े, तो मिलन हो। खो जाओ तो खोज पूरी हो जाये। तो उसके भीतर मस्तिष्क की एक नयी अभिव्यंजना होती है। गगन सिषर महिं बालक बोले….। उसके सहस्त्रार में, उसके

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