स्वयं की कमियों को ज्ञान मार्ग द्वारा ही खण्डित करो-योगी आदित्य नाथ

स्वयं की कमियों को ज्ञान मार्ग द्वारा ही खण्डित करो-योगी आदित्य नाथ

बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का विशेष व्याख्यान्

 

युवा प्रत्येक रूप से सक्षम होता है, मजबूती के साथ-साथ दृढ़ संकल्प और अपने भीतर छिपी असीम शक्ति का परिचायक बनकर वह शिवाजी रूप में समाज का मार्ग दिखाता है तो अर्जुन बनकर धर्मयुद्ध का महारथी भी बनता है। कृष्ण रूप में पथप्रर्दशक बनता है तो चाणक्य रूप में नीति का ज्ञाता भी बन सकता है। युवा ही किसी देश की वास्तविक धुरी है जिसपर पूरा समाज टिका हुआ है। ये उद्गार हैं-उत्तरप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्य नाथ जी के। आज बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में ब्रह्मलीन महन्त चांदनाथ जी योगी की स्मृति में विश्वविद्यालय द्वारा उनकी याद में स्मृति व्याख्यान माला का आरम्भ किया गया तथा आज प्रथम वक्तव्य के लिए योगी महासभा के अध्यक्ष, गोरक्ष पीठाधीश्वर, अखिल भारतीय भेख महासभा के अध्यक्ष तथा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और महन्त चांदनाथ जी के परममित्र हिन्दुत्व ध्वजा वाहक योगी आदित्य नाथ जी को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया। इस विशेष व्याख्यान का शीर्षक था- ‘नैतिक मूल्य एवं चरित्र निर्माणÓ। सर्वप्रथम योगी आदित्यनाथ अपेन विशेष हैलिकाप्टर द्वारा विश्वविद्यालय परिसर के इन्जीनियरिंग विभाग में उतरे और विश्वविद्यालय के सभागार में पहुँचे। विश्वविद्यालय के पूरे छात्र समूह ने भारत माता की जय और वन्दे मातरम् के उद्घोष बीच उनका भव्य स्वागत किया। सर्वप्रथम बाबा मस्तनाथ जी, बाबा गोरक्षनाथ जी को नमन कर दीप प्रज्जवलित करते हुए सभी मंचासीन विभूतियों ने ब्रह्मलीन महन्त योगी चांदनाथ जी को श्रद्धांजलि दी। बाबा मस्तनाथ मठ गद्दी नशीन योगी बालकनाथ जी तथा विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. मारकण्डे आहूजा तथा हरियाणा सरकार की तरफ से रोहतक के विधायक तथा सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर ने माननीय आदित्यनाथ जी का विश्वविद्यालय परिसर में स्वागत किया। नैतिक मूल्य एवं चरित्र निर्माण पर अपने विचार रखते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महन्त चांदनाथ जी के साथ मेरा सम्बन्ध बहुत पुराना है। सन् 1993 से वे मेरे मार्गदर्शक तथा प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं। महन्त जी ने अपने जीवन में सदैव एक बात का पालन किया वो थी समाज सेवा। उन्होंने कहा कि विपरीत अवस्था में भी हमें धैर्य का साथ कभी नहीं छोडऩा चाहिए। महाभारत में युधिष्ठिर यक्ष संवाद का जिक्र करते हुए उन्होंने महन्त चांदनाथ के धैर्य को विपत्ति का बड़ा मित्र बताते हुए स्वयं महन्त जी को धैर्य की प्रतिमूर्ति की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि महन्त जी विपरीत परिस्थितियों में भी कभी नहीं डगमगाए तथा अपने सतत प्रयासों द्वारा उन विपरीत अवस्थाओं में भी अपने लक्ष्य तक अवश्य पहुँचे। उन्होंने रामकृष्ण और विवेकानन्द का उदाहरण देते हुए बताया कि लोक कल्याण हेतू समर्पण ही सन्यास का वास्तविक मार्ग है। एक तेजोमयी शक्ति के रूप में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय का निर्माण कर महन्त चांदनाथ जी ने लोक कल्याण के मार्ग का्रे प्रशस्त किया है। नाथ सम्प्रदाय तथा राष्ट्रीयता की रक्षा के लिए संकोच रहित व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने अपनी विशेष पहचान बनाई है। आधुनिकता में पुरातनता का संगम कर गंगा यमुना के संगम का उचित उदाहरण हमें यहां दिया है। उन्होंने कहा कि विकास प्रक्रिया को निरन्तर आगे बढ़ाए रखने के लिए युवाओं की आवश्यकता है क्योंकि युवाओं में ही अपार संभावनाएं छिपी हुई हैं। वे ही देश का दिशा निर्धारण कर सकते हैं परन्तु उन्हें स्वयं उचित दिशा एवं आधार की आवश्यकता है। महन्त चांदनाथ जैसे विचारशील व्यक्ति के विचार कभी मरते नहीं हैं तथा किसी उद्देश्य से किया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। युवाओं को संघर्षों से पलायन करने की प्रव़ृत्ति से तौबा करनी होगी। क्योंकि सफलता का मार्ग संघर्षों से ही मिलता है। सदैव सकारात्मक रहकर ही आप संघर्षों के मार्गों पर अग्रसर हो सकते हैं। भारत जैसे बड़े लोकतन्त्र में जातिगत भाषागत रूप अनुसार वेशभूषा अनुसार अन्तर हो सकते हैं परन्तु सभी में भारतीयता तथा सनातनता का स्वरूप एक ही है। हम सब को अपने संवाद की ताकत को बढ़ाना होगा क्योंकि संवाद ही वास्तव में संघर्षों से दूर रहने की कला है। अपनी रसनात्मक उर्जा का उपयोग करके हम बड़े से बड़े संघर्ष को आसानी से टाल सकते हैं। सकारात्मकता के लिए आप मन्दिर, किसी देव स्थान या उपासना पद्धति को अपना सकते हैं जो आपको बर्हिमुखी से अन्र्तमुखी की यात्रा करवाए तथा आपके भीतर या आपके आसपास की नकारात्मकता को दूर करे। उन्होंने उपस्थित सभी जनों का आह्वान किया कि सबसे कम उम्र आयु के कुलाधिपति के रूप में तथा नव नियुक्त मठाधीश महन्त बालकनाथ जी के साथ मिलकर आज महन्त चांदनाथ जी के सपनों को सत्य करने का समय है। आप सभी बालकनाथ जी को पूर्ण सहयोग दें तथा जिस प्रकार महन्त चांदनाथ जी ने समाज सेवा के रूप में एक विशेष उदाहरण उपस्थित किया है उसी मार्ग पर इन्हें अग्रसर करने में अपना सहयोग दें।

इससे पहले विश्वविद्यालय कुलपति डॉ. मारकण्डे ने मंच संचालन करते हुए ब्रह्मलीन महन्त चांदनाथ योगी जी पर तैयार एक विशेष बायोग्राफिक प्रजेंटेशन सभी के समक्ष रखी। अपनी इस विशेष प्रस्तुति द्वारा डॉ. मारकण्डे ने महन्त जी के पूरे जीवन वृत का खाका सभी को पेश किया। उन्होंने बताया कि महन्त चांदनाथ योगी एक आदर्श नाम एक महान संत जिन्होंने केवल अपने स्वयं के लिए नहीं सोचा अपितु शिक्षा के माध्यम से लाखों लोगों की सेवा के लिए सदैव कार्यरत रहे। वह एक वास्तविक परोपकारी, शिक्षाविद्, विद्वान और प्रेरणास्त्रोत रहे हैं। उन्होंने अपना समस्त जीवन गरीब व जरूरतमंद लोगों की सेवा एवं उत्थान के लिए लगाया। वे एक सच्चे कर्मयोगी रहे हैं व उनके विचारों से लाखों लोगों के जीवन में नई प्रेरणा मिली। सच में वह एक पूर्ण आध्यात्मिक विभूति थे जिन्होंने जिस दिन से गद्दी संभाली उसी दिन से पूर्ण कत्र्तव्यनिष्ठा, सत्यनिष्ठा एवं दृढ़ इच्छा शक्ति से अनेकों कार्य किए। प्रतिवर्ष एक शिक्षण संस्थान का निर्माण उनका ध्येय था। वे एक सकारात्मक सोच के धनी, साहसी, सहानुभूति एवं समानानुभूति से परिपूर्ण, दृढ़ निश्चयी, ध्येयनिष्ठ व्यक्ति थे। उन्होंने महन्त चांदनाथ जी के पूरे जीवन वृतान्त को सामने रखते हुए बताया कि

21 जून, 1956 में बेगमपुर -दिल्ली में जन्मे

1977 में बी.ए. -आनर्स- की उपाधि

21 फ रवरी, 1978 नाथ सम्प्रदाय में दीक्षित

21 मई 1984 उत्तराधिकारी नियुक्त

30 मई, 1984 कानूनन वसीयत

7 जनवरी, 1985 गद्दी नशीन महन्त

1986 में गुरु समाधि स्थल का निर्माण

1987 में सिविल रोड पब्लिक स्कूल

1988 में आवासीय पब्लिक स्कूल

1989 में श्री बाबा मस्तनाथ सभागार

1990 में शिव मन्दिर की स्थापना

1991 में प्राचीन शिव मन्दिर का जीर्णोद्धार

1992 में थेहड़ी डेरा मन्दिर निर्माण

1993 में चक 7 एल.एल. का निर्माण

1994 में श्री बद्रीनाथ धर्मशाला का निर्माण

1995 में एम.बी.ए. कॉलेज की स्थापना

1996 में फ ार्मेसी एवं डी.एड. कॉलेज

1997 में डेन्टल व इंजीनियरिंग कॉलेज

1998 में फ ीजियोथैरेपी एवं मार्डन साईंस

1999 में संस्कृत कॉलेज की स्थापना

2000 में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना

2001 में कन्या छात्रावास की स्थापना

2002 में रणपत-धातानाथ समाधि स्थल

2003 में रैबारी धर्मशाला निर्माण

2004 में शिक्षा रत्न एवं बहरोड विधायक

2005 में चिकित्सा रत्न एवं छात्रावास नं. 2

2006 में श्री मस्तनाथ विशाल मूर्ति निर्माण

2007 में राजस्थान गौरव अवार्ड

2008 में बी.एड. कॉलेज

2009 में एम.टेक. और एम. फ ार्मा कोर्स

2010 एम.सी.ए. और सिविल इंजीनियरिंग

2011 में श्री बाबा मस्तनाथ पॉलीटैक्निक

2012 में श्री बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय

2013 में श्री बाबा मस्तनाथ विज्ञान विभाग

2014 में श्री बाबा मस्तनाथ विधि विभाग

2014 सांसद अलवर

2015 में श्री बाबा मस्तनाथ मानविकी विभाग

2016 होम साईंस, मास कम्यूनिकेशन विभाग

2017 पंचवर्षीय मैनेजमेंट

उन्होंने कहा कि इस तरह से एक महान कर्मयोगी, एक ध्येयनिष्ठ, एक सत्यनिष्ठ, एक अध्यात्मनिष्ठ, एक पूर्ण रूपेण मां  भारती के सच्चे सपूत की इहलोक की यात्रा 17 सितम्बर 2017 को पूरी हुई। उनका आशीर्वाद हमें सदैव मिलता रहेगा ऐसी सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ जी से प्रार्थना है। अपने परम पूज्य गुरू जी द्वारा बताए गए ”विधेयम् जन सेवनम्ÓÓ की भावना से प्रेरित होकर और उनके सपने को साकार करने हेतु शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफ लता प्राप्त की। जिस शिक्षा रूपी पौधे की नींव आपके पूज्य गुरुजी ने रखी थी, उस पौधे को 2012 में आपने विश्वविद्यालय के रूप में एक वट वृक्ष बनाकर प्रस्तुुत किया। अब इस विश्वविद्यालय में 20 महाविद्यालय एवं 70 से अधिक पाठ्यक्रम चल रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में नाथ सम्प्रदाय में पूरे विश्व में आप अग्रणीय रहे। थेहड़ी -हनुमानगढ़-राजस्थान में भी आपने बंजर पड़ी भूमि को सोना उगलने वाली उपजाऊ धरती बना दिया। आप 2004 में बहरोड़ -राजस्थान से विधायक बने और मात्र चार साल में बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र की काया पलट दी। आप 2014 में अलवर से सांसद बने और उसी तरह अलवर क्षेत्र के विकास की गति देने में लगे ही थे कि बीमारी ने आप को घेर लिया और 17 सितम्बर, 2017, चैत्र सुदी द्वादशी को आप ब्रह्मलीन हो गए, किन्तु प्रेरणा रूप में आप सदैव हमारे बीच विद्यमान रहेंगे। माननीय सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर जी ने हरियाणा सरकार की तरफ से उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए मठ के मार्गदर्शन में कार्यरत रहने का आश्वासन दिया। अपने धन्यवाद सम्बोधन में महन्त योगी बालकनाथ ने कहा कि मेरे पूजनीय गुरु जी द्वारा अपने 32 वर्ष के महन्त कार्यकाल में जो कार्य समाज के लिए या शिक्षा क्षेत्र में किए गए उन्हें पूरा करने के लिए ३२ जन्म भी कम हैं। उन्होंने सदैव हमें प्रेरणा देते हुए कहा कि बादल तभी तक काले हैं जब तक इनके पास पानी भरा रहता है और वर्षारूपी अमृत लुटा कर बादल सफेद हो जाते हैं। उसी प्रकार समाज सेवा में अपना सर्वस्व लगाकर हमें भी स्वयं को सदैव पाक साफ रखना है। समाज सर्वोपरि है और उसकी सेवा हमारा कार्य, मुझे पूर्ण विश्वास है कि उनके दिखाए मार्ग पर चलने में आप मेरा पूर्ण सहयोग देंगे। मेरे गुरुजी ने सदैव सन्देश दिया कि समाज की एकता ही वास्तविक शक्ति है। समाज को सदैव एकजुट बनाए रखना आवश्यक है। धर्म, जाति, रंग-रूप के आधार पर भेद भाव समाज को बांट सकता है। समाज की सुन्दरता उसक ेजुड़ाव में है ना कि उसके बिखराव में। उन्होंने सदैव पूरे समाज को एकजुट बनाए रखने का प्रयास किया और आज हम भी उसी मार्ग पर आगे बढ़ते रहने का संकल्प लेते हैं।

महन्त चांदनाथ जी की कलम से लिखा अन्तिम दिनों में सन्देश

  • सबको सादर आदेश-आदेश।

  • ये कागज मेेरे लिए पृथ्वी है बाकी जिम्मेदारी आपकी है।

  • मैं बाबा के चरणों में हूं चावला साहब मेहरबानी।

  • मन्दिर तुरन्त बनवाएँ।

  • पुजारी जी का ध्यान रखें।

  • मैं सब आपके लिए था और हूं और रहूंगा।

  • साधु मेरे, मैं साधुओं का।

  • जीवन यात्रा सभी की पूरी होती है मेरी भी हुई।

  • मैं गांववासियों से भी खुश हूं।

  • मैं अलवर की जनता का सदैव आभारी रहूंगा।

  • जो कार्य मैं अलवर में नहीं कर पाया वह मेरा शिष्य बालकनाथ पूरा करेंगे।

  • डॉ. मारकण्डे साहब से भी मैं बहुत खुश हूं वह मेरी छाया ही है।

  • ये सभी आप बालकनाथ को दे देना।

विश्वविद्यालय परिसर तथा बाबा मस्तनाथ मठ की तरफ से योगी आदित्यनाथ जी को अंगवस्त्र तथा शक्ति स्वरूपा गदा एवं तलवार भेंट की गई। उनके साथ आए उत्तरप्रदेश के मंत्री नन्दगोपाल गुप्ता को भी विश्वविद्यालय परिसर की तरफ से स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट किया गया। माननीय मनीष ग्रोवर जी का भी अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया। इसके पश्चात् योगी आदित्य नाथ जी अखिल भारतीय भेख बारह पंथ योगी महासभा आकस्मिक बैठक को सम्बोधित करने के लिए मठ के गीता भवन में आयोजित विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए। जहां उन्होंने अध्यक्ष रूप में दो प्रस्तावों को रखा। जिनमें प्रथम ब्रह्मलीन महन्त चांदनाथ जी को श्रद्धांजलि तथा दूसरा उनके स्थान पर उपाध्यक्ष पद के लिए महन्त योगी बालक नाथ जी के नाम का सुझाव भी दिया। सभी उपस्थित सिद्धजनों ने अपने प्रतिनिधियों के द्वारा एक मत होकर बाबा बालकनाथ जी को अखिल भारतीय भेख बारह पंथ योगी महासभा का उपाध्यक्ष स्वीकार किया तथा महासभा की ओर से मुख्यमंत्री आदित्य नाथ को मुख्यमंत्री बनने के बाद इस प्रथम बैठक में विशेष स्मृति चिन्ह देकर भी सम्मानित किया गया। नवनियुक्त उपाध्यक्ष महन्त योगी बालकनाथ जी को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आज के कार्यक्रम में जहां सन्तों महन्तों की भीड़ रही वहीं रोहतक से भी अनेकों गणमान्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई जिनमें बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय उपकुलपति डॉ. अन्जू आहूजा, एल.पी.एस. बोसार्ड के राजेश जैन, डॉ. प्रदीप गर्ग, डॉ. अरविन्द दहिया, डॉ. एस.एल.वर्मा, डॉ. आदित्य बतरा, डॉ. सुनील गुलाटी, डॉ. ध्रुव चौधरी, डॉ. सुनील मुंजाल, श्री विपिन गुप्ता, समर्थ गुप्ता, बीजेपी से श्री रमेश भाटिया, ओम प्रकाश बागड़ी, बाबा मोती नाथ, बाबा सूरज नाथ, बाबा चेताई नाथ, बाबा विलास नाथ, बाबा शेखर नाथ, बाबा जस नाथ, बाबा शेरनाथ, बाबा खड़ेसरी, बाबा कृष्णनाथ, बाबा ब्रह्मनाथ, बाबा योगेन्द्र नाथ सहित विश्वविद्यालय परिसर के सभी कर्मचारी, बच्चे, बाबा मस्तनाथ पब्लिक स्कूल के सभी अध्यापक गण, कर्मचारी, उपस्थित थे।

 

 

इन्हें भी देखे: