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18
Sep

समाज के प्रति उत्तरदायित्व की प्रत्यक्ष मूर्त थे महन्त चाँदनाथ योगी

समाज के प्रति उत्तरदायित्व की प्रत्यक्ष मूर्त थे महन्त चाँदनाथ योगी महन्त चाँदनाथ को श्रद्धांजलि देने पहुँची पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष किरण चौधरी समाज में अपने उत्तरदायित्व को निभा पाना प्रत्येक व्यक्ति के लिए सम्भव नहीं है। हम सदैव समाज को दूसरा स्थान देते हैं। जबकि कुछ व्यक्ति केवल और केवल परहित के लिए ही समाज में आते हैं। महन्त चाँदनाथ

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18
Sep

महंत चाँद नाथ जी योगी की अंतिम यात्रा की यादें

18
Sep

बाबा मस्तनाथ मठ गद्दी नशीन महन्त चाँदनाथ योगी हुए ब्रह्मलीन

अध्यात्म और शिक्षा के महान् पुँज का देहावसान अपूरणीय क्षति बाबा मस्तनाथ मठ गद्दी नशीन महन्त चाँदनाथ योगी हुए ब्रह्मलीन                 विधेयम् जन सेवनम् की भावना को सिरमौर बनाने वाले अपने गुरु आदर्शों पर चलकर शिक्षा की ज्योति को चहुँ ओर प्रकाशित करने वाले प्रकाश पुँज बाबा मस्तनाथ मठ अस्थल बोहर के मठाधीश एवं सांसद अलवर ने मानव सेवा के

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16
Sep

रुद्राक्ष की माला कैसे बनायें

रुद्राक्ष चाहे कितने ही मुख वाला हो, सामर्थ्यानुसार सोने अथवा चाँदी की छतरी से जुड़वा कर स्वर्णकार से उसका सुन्दर सा आकार बनवा लें। रुद्राक्ष के दानों के दोनों ओर शुद्ध मूंगे के मनके भी पहने जाते हैं। सबसे सस्ता और सरल तरीका ये है कि सूती धागा बटकर उसे मजबूत बना लें और उसमें पिरोकर रुद्राक्ष पहनें। कुछ लोग

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16
Sep

रुद्राक्ष खरीदते समय सावधानियां एवं धारण विधि

रुद्राक्ष खरीदते समय सावधानियां एवं धारण विधि   रुद्राक्ष आध्यात्मिक दृष्टि से जितना मूल्यवान है, उतना भौतिक दृष्टिकोण से नहीं फिर भी रुद्राक्ष खरीदते समय जो सामान्य जानकारी ग्राहक को होनी चाहिए उसकी चर्चा भी आवश्यक है। रुद्राक्ष खरीदते समय जब दुकानदार ८-१० रु° से लेकर ४००-५०० रु० तक की माला ग्राहक के सामने रखता है तो निश्चित ही खरीददार

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16
Sep

गौरी शंकर रुद्राक्ष के फायदे व धारण विधि

गौरी शंकर  और त्रिजुगी  सब प्रकार के रुद्राक्षों के अलावा कुछ रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से आपस में जुड़े होते हैं (जैसे जुड़वां केला आपने अवश्य देखा होगा) ये जुड़वां रुद्राक्ष भी वृक्ष पर ही होते हैं। अत: इस प्रकार से दो रुद्राक्ष जो जुड़वां उत्पन्न होते हैं उन्हें गौरी शंकर कहते हैं। इसी प्रकार यदि तीन रुद्राक्ष एक साथ जुड़े

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14
Sep

आगे बढ़ना ही जीवन है

बाबा जी  का एक भक्त  कहीं जाने के लिए तैयार था। किन्तु रात्रि हो चुकी थी। बाबाजी के शिष्य ने उस भक्त से पूछा-भक्त! कहां जा रहे हो? वह बोला-दूसरे गाँव में मेरी माँ रहती है। वहीं जाना है। घनी रात्रि होने के कारण बाबाजी ने उस भक्त से कहा-यहाँ से लालटेन लेते जाओ।इसके प्रकाश में तुम ठीक से मार्ग

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13
Sep

प्रेम में कोई लेन देन नहीं होता

यात्रा पर जाते समय श्री बाबा मस्तनाथ जी अपनी शिष्य मण्डली को सदैव अपने साथ रखते थे। उनमें से एक अपनी पुस्तक में लिख देता था। प्रतिदिन का उसका यही क्रम था। ऐसे ही दिन बीतते जा रहे थे। यात्रा करते करते सूरज ढल चुका था। पक्षियों की चहचाहट सुनाई दे रही थी, सब पक्षी अपने-अपने घोंसलों में लौट आये

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12
Sep

समर्पण का वास्तविक अर्थ

समर्पण का वास्तविक अर्थ है शुद्ध के प्रति मन में कोई सन्देह न रहे। गुरु के श्रीमुख से जो भी आदेश निकले उससे पूर्व शिष्य समझ जाये और उस कार्य को पूरा कर  दे | यदि हमने गुरु से तर्क वितर्क किया तो हम शिष्यता की भावभूमि से परे हट जाते हैं। जो सेवा नहीं कर सकता, वह समर्पण भी

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11
Sep

विचारों की शक्ति

  सदियों पहले बुद्ध ने कहा,”हम जो भी है अपने पुराने विचारों के कारण हैं। अधिकतर लोग अपनी वर्तमान परिस्थितियों की ओर देखकर कहते हैं, “यह मैं हूँ।” यह आप नहीं हैं। यह तो आप थे। उदाहरण के लिए मान लें कि आपके सम्बन्ध या स्वास्थ्य वैसे नहीं है जैसे आप चाहते हैं। यह आपका वर्तमान स्वरूप नहीं है यह

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