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24
May

Initiation of Sheelka into Nath Sect

Initiation of Sheelka into Nath Sect Statue of  ((Siddh Shiromani Baba Mastnath Ji))  A Jat named Sheelka lived in village Bhalaut. He was very de-voted to the Sadhus. He learnt that in the woods of Khokhrakot, Mast Nath a reputed Saint, was in penance. His fame had spread far and Wide. Sheelka made up his mind to see him. Carrying

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24
May

Narration of an old tale by Mast Nath

Narration of an old tale by Siddh Shiromani Baba Mast Nath   Once, Baba Mast Nath along with hordes of disciples reached a dense forest. Deer, Peacocks, monkeys, jackals and leopards were  there in plenty. The area was covered in lush green vegetation. The beautiful landscapes soothed the senses. There was a mound of earth which looked like some village

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15
May

“गुरु गोरक्ष नाथ जी का बाबा मस्तनाथ जी के रूप मैं प्रकट होना”(अवतार धारण करना )

“गुरु गोरक्ष नाथ जी का बाबा मस्तनाथ जी के रूप मैं प्रकट होना” वर्तमान हरियाणा राज्य के रोहतक जिला में कंसरेटी  नामक एक गांव है |उस गांव में एक अत्यंत भगवद्भक्त उदार चरित्र परोपकारी साधु महात्माओं के प्रति असीम श्रद्धा रखने वाला सबला नामक गृहस्थ निवास करता था श्री सबला का जन्म वैश्य कुल में हुआ था उन्होंने व्यापार के

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14
May

गुरुदेव (सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ जी )का त्रिकाल बोध

#बाबा मस्तनाथ जी का त्रिकाल बोध# सिद्ध शिरोमणि श्री बाबा मस्तनाथ जी एक बार अपने अनेक शिष्यों के साथ देश की धार्मिक यात्रा के लिए चले जा रहे थे | रास्ते में उन्हें एक बहुत बड़ा टीला दिखाई पड़ा उस टीले के चारों ओर उन दिनों बीहड़ वन था |वनखंड में उस विशालकाय टीले को देखकर सिद्ध शिरोमणि मस्त नाथ

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12
May

पावन अखंड ज्योति

पावन अखंड ज्योति सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ जी का समूचा जीवन ज्योति स्वरूप था अतः उन की पावन स्मृति को उनके जीवन की अनुरूपता प्रदान करने के लिए उनकी समाधि पर शुद्ध घी की अखंड दीप ज्योति प्रज्वलित कर दी गई जो तब से अब तक निरंतर प्रज्ज्वलित चली आ रही है | इस अखंड ज्योति के शुभ दर्शन कर

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11
May

श्री गुरु गोरखनाथ जी की संध्या आरती

श्री गुरु गोरखनाथ जी की संध्या आरती   ॐ गुरुजी शिव जय जय गोरक्ष देवा श्री अवधू हर-हर गोरक्ष देवा | सुर नर मुनि जन ध्यावत सुर नर मुनि जन सेवत | सिद्ध करें सब सेवा श्री अवधू संत करें सेवा | शिव जय जय गोरक्ष देवा ||१|| ॐ गुरुजी योग युगती  कर जानत मानत ब्रह्मज्ञानी | श्री अवधू मानत

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10
May

गोरख वाणी मरो हे जोगी मरो

गोरख वाणी मरो हे जोगी मरो नादै लीन ब्रह्मा, नादै लीना नर हरि।१। नादै लीना ऊमापति, जोग ल्यौ धरि धरि।२। नाद ही तो आछै, सब कछू निधांनां।३। नाद ही थै पाइये, परम निरवांनां।૪। महायोगी गोरख कहते है की मूल ॐकार के अभिव्यक्त रुप नाद (शब्द ब्रह्म) मे ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश लीन (व्याप्त) है। योगी को चाहिए की नाद

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9
May

नवनाथ-शाबर-मन्त्र-श्री नवनाथ-स्तुति

नवनाथ-शाबर-मन्त्र   “ॐ नमो आदेश गुरु की। ॐकारे आदि-नाथ, उदय-नाथ पार्वती। सत्य-नाथ ब्रह्मा। सन्तोष-नाथ विष्णुः, अचल अचम्भे-नाथ। गज-बेली गज-कन्थडि-नाथ, ज्ञान-पारखी चौरङ्गी-नाथ। माया-रुपी मच्छेन्द्र-नाथ, जति-गुरु है गोरखनाथ। घट-घट पिण्डे व्यापी, नाथ सदा रहें सहाई। नवनाथ चौरासी सिद्धों की दुहाई। ॐ नमो आदेश गुरु की।।   श्री नवनाथ-स्तुति   “आदि-नाथ कैलाश-निवासी, उदय-नाथ काटै जम-फाँसी। सत्य-नाथ सारनी सन्त भाखै, सन्तोष-नाथ सदा सन्तन की

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9
May

नाथ सम्प्रदाय के बारह पंथ

नाथ सम्प्रदाय के बारह पंथ   नाथ सम्प्रदाय के अनुयायी मुख्यतः बारह शाखाओं में विभक्त हैं, जिसे बारह पंथ कहते हैं । इन बारह पंथों के कारण नाथ सम्प्रदाय को ‘बारह-पंथी’ योगी भी कहा जाता है । प्रत्येक पंथ का एक-एक विशेष स्थान है, जिसे नाथ लोग अपना पुण्य क्षेत्र मानते हैं । प्रत्येक पंथ एक पौराणिक देवता अथवा सिद्ध

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9
May

नाथ सम्प्रदाय की उत्त्पत्ति एवं परिचय

नाथ सम्प्रदाय का परिचय यह सम्प्रदाय भारत का परम प्राचीन, उदार, ऊँच-नीच की भावना से परे एंव अवधूत अथवा योगियों का सम्प्रदाय है।इसका आरम्भ आदिनाथ शंकर से हुआ है और इसका वर्तमान रुप देने वाले योगाचार्य बालयति श्री गोरक्षनाथ भगवान शंकर के अवतार हुए है। इनके प्रादुर्भाव और अवसान का कोई लेख अब तक प्राप्त नही हुआ। पद्म, स्कन्द शिव

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