“गुरु गोरक्ष नाथ जी का बाबा मस्तनाथ जी के रूप मैं प्रकट होना”(अवतार धारण करना )

“गुरु गोरक्ष नाथ जी का बाबा मस्तनाथ जी के रूप मैं प्रकट होना”

Baba Mastnath Math

वर्तमान हरियाणा राज्य के रोहतक जिला में कंसरेटी  नामक एक गांव है |उस गांव में एक अत्यंत भगवद्भक्त उदार चरित्र परोपकारी साधु महात्माओं के प्रति असीम श्रद्धा रखने वाला सबला नामक गृहस्थ निवास करता था श्री सबला का जन्म वैश्य कुल में हुआ था उन्होंने व्यापार के द्वारा बहुत साधन उपार्जन किया था |

भारतवर्ष में उन दिनों माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने के लिए रेलगाड़ियों का प्रचलन नहीं हुआ था और ना ही तब भारवाहक मोटर ट्रकों का आविष्कार हुआ था मरुस्थल में व्यापार वाणिज्य के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर माल खरीद कर ले जाने के लिए एक ही विधि प्रचलित थी वह यह कि लोग व्यापार का माल ऊंटों पर लादकर एक दूसरे स्थान पर ले जाते और उसका क्रय विक्रय करते थे ऊँटों की पीठ पर माल लादकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर क्रय विक्रय करने वाले व्यापारी को “रेबारी” के नाम से पुकारा जाता था श्री सबला जी के व्यापार की भी यही विधि थी |

अतः उन्हें भी रेवारी ही कहा जाता था एक बार श्री सबला ऊंटों की कतार लादे यमुना नदी के किनारे किनारे अपना माल खरीदने बेचने के लिए किसी नगर की ओर जा रहे थे उनकी दृष्टि एक परम तपस्वी योगेश्वर पर पड़ी श्री सबला जी ने अतीव श्रद्धा पूर्वक योगेश्वर की अभ्यर्थना की उन्होंने सेवा में पुष्प अर्पण किए उन्होंने भक्ति भाव से योगेश्वर की बंदना की योगेश्वर प्रसन्न हुए उन्होंने सबला से कुशल-क्षेम पूछा भक्ति भाव से भरे सबला योगेश्वर के चरणों में गिर पड़ा उन्होंने योगेश्वर से निवेदन किया कि योगीराज आपके श्री चरणों की कृपा से मेरे पास सब कुछ है धन धान्य से संपन्न घर है साध्वी सेवा परायण तथा स्नेहमई पत्नी भी मिली है पर हम दोनों के मन में एक अभाव खटकता रहता है|

उससे हमारा सुखी जीवन अत्यंत वेदनामय नीरस  तथा बेचैन हो गया है वह अभाव है श्रेष्ठ संतान का अभाव इस हेतु हे दया देवाधिदेव आप हम पर अनुग्रह करके हमें एक श्रेष्ठ संतान दीजिए |

Baba Mastnath ji

योगेश्वर ने भक्त प्रवर सबला जी की भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें तथास्तु कहा और उन्हें एक ही वर्ष की अवधि में उनकी इच्छा पूर्ण होने का वरदान दिया यह योगेश्वर स्वयं महा सिद्ध श्री गोरक्षनाथ जी ही थे जिन्होंने तपोबल से यमराज के काल दंड को तोड़ डाला था और जो सदा अजर-अमर हो ब्रह्मांड में विचरण करते रहते हैं योगेश्वर से पुत्र रत्न प्राप्ति का वरदान पाने से प्रसन्नचित श्री सबला वहां से सीधे अपने घर आए उन्होंने अपनी साध्वी पत्नी को यह शुभ समाचार सुनाया वह आह्लाद से झूम उठी और उसी दिन से एक-एक दिन की हुई 1 वर्ष की अवधि पूर्ण होने की बाट जोहने लगी वर्ष की समाप्ति निकट आ पहुंची तब सबला की साध्वी पत्नी में कोई भी गर्भ लक्षण दिखलाई नहीं पड़े तब भी प्रभु विश्वासी दंपत्ति की योगेश्वर के वचनों की सिद्धि पर दृढ आस्था  बनी रही  और वह निश्चय ही इसी अवधि में पुत्र पुत्र रत्न प्राप्ति होगी अपनी इस धारणा से दृढ बने  रहे 1 वर्ष की अवधि पूर्ण होते होते योगेश्वर श्री गोरखनाथ जी को सबला को दिए  वरदान की याद आई उन्होंने योग बल से अपने शरीर को 1 वर्ष के बालक के रूप में परिवर्तित कर लिया और वह उस रास्ते पर लेट कर पांव का अंगूठा चूसने लगे

Baba Mastnath ji

जिस मार्ग से सपत्नीक सबला किसी कार्य से अपने एक रिश्तेदार के यहां किसी दूसरे गांव जा रहा था 1 वर्ष की आयु के दिव्य तेजस्वी तथा रूप संपन्न बालक को रास्ते में देख श्री सबला जी तथा उनकी धर्मपत्नी विस्मय विमुग्ध हो गए ठगे से खड़े रह गए उन्होंने सोचा कि इस निर्जन वन की राह में यह बालक कहां से आया सबला दंपत्ति बहुत समय तक प्रतीक्षा करते रहे कि उस परम तेजस्वी रूपशील  निदान सौंदर्य के प्रतिरूप बालक को लेने के लिए कोई स्त्री या पुरुष वहां आ जाए पर जब उस बालक को लेने के लिए वहां कोई नहीं आया तब उन्होंने बालक को प्यार से अपनी गोद में उठा लिया और वह उसे अपने साथ लेकर चल पड़े आस-पास के गांव में जाकर ग्राम वासियों से सबला जी ने पूछा यह बालक किसका है पर सभी ग्राम वासियों ने उत्तर दिया यह बालक उनके गांव में किसी भी व्यक्ति का नहीं है साथ ही ग्राम वासियों ने सबला जी  से यह भी कहा यह बालक परमात्मा ने आपको दिया है |

अतः आप ही इसे ले जाकर अपने पास रखिए इस पर सबला बालक को लेकर अपने घर आए यह सुसमाचार शीघ्र ही गांव के घर-घर में फैल गया सारे गांव में प्रसन्नता का पारावार न रहा क्योंकि श्री समलाजी समूचे गांव में अति लोकप्रिय थे और सारे ग्राम वासियों के मन में यह हार्दिक अभिलाषा बनी रहती थी की सबला का घर भी पुत्र रत्न से देदीप्यमान हो जाए |

रास्ते में पड़े बालक को पाकर सबला निहाल हो गया इस प्रसन्नता में उसने समस्त ग्राम वासियों को मिष्ठान आदि प्रदान कर सत्कार किया तथा ब्राह्मणों तथा अन्य पूज्य जनों को धन रत्न आभूषण वस्त्रादि देकर उन्हें सम्मानित किया |

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